(तेरे बिना / तुझसे दूर हूँ)
"Tujhse Door Hoon" is a heart-wrenching Urdu gazal about love, separation, and the quiet desperation of longing. Written in the classical style with a single radif (nahin milta), these 24 couplets explore the pain of loving someone who is no longer yours — yet never leaves your breath, your dreams, or the empty streets of their city. Each verse is a slow confession. Each rhyme is a ghost. This is not a song. This is silence that learned to speak. दिल को सुकूँ आराम कहीं भी नहीं मिलता तुझसे जो दूर हूँ मुझे कुछ भी अच्छा नहीं मिलता हर सुबह तेरी याद लगे जैसे कोई ज़ंजीर तेरे बिना ये दिल किसी और में नहीं मिलता बाग़ों में फूल खिले हैं मगर ख़ुश्बू तुम्हारी जब तुम नहीं तो फूल से दिल का रुतबा नहीं मिलता रातों को चाँद तारे सब रोते हैं मेरे साथ ऐसे में नींद का एक पल भी मुश्किल नहीं मिलता हाथों में हाथ तुम्हारे होते तो क्या बात होती अब तो बस सपनों में वो हाथों का छुआ नहीं मिलता तेरे शहर की गलियाँ मुझसे पूछती हैं अक्सर वो दीवाना क्यूँ भटके, उसका कोई ठिकाना नहीं मिलता मैंने तो चाहा था तुझे उस तरह जैसे मूर्ति में देवता पर तेरे दिल में मेरे लिए एक कोना भी नहीं मिलता दूरियाँ इतनी बढ़ गई हैं के फ़ासले सिमटते नहीं हर मोड़ पर तुम नज़र आते हो, मगर तुम नहीं मिलता जब भी लिखता हूँ तेरा नाम, काग़ज़ जल उठता है शायद अब इस कलम में वो जादू नहीं मिलता खुदा से ये दुआ है कि तू हमेशा खुश रहे मगर तेरी ख़ुशी में मेरा कोई हिस्सा नहीं मिलता अब तो बस इश्क़ ही बचा है, और इश्क़ की आग बुझाने वाला कोई सावन भी नहीं मिलता दिल के दरवाज़े पे लिखा है: "बस एक तुम्हारा नाम" कोई और आए तो उसे दस्तक देने का हुनर नहीं मिलता हर दर्द तेरा अपना है, हर दर्द मुझे भाता है बस तेरे बिना मरहम का कोई टुकड़ा नहीं मिलता तूने पूछा था एक बार: "मोहब्बत में क्या रखा है?" आज बता दूँ — खुद से खुद को बचाने का सबब नहीं मिलता बारिश की बूँदों में तेरा चेहरा नाचता है छतरी तो ले लूँ, मगर तुम्हें भीगने से रोकने का हुनर नहीं मिलता तेरे नाम की माला जपूँ तो दिल हल्का हो बिना तेरे ज़िक्र के कोई हल्कापन नहीं मिलता हर साँस तुझसे आती है, हर साँस तुझपे जाती है बीच में कहीं साँसों को थमने का मौक़ा नहीं मिलता उसने कहा था: "भूल जा मुझे, यही अच्छा है" मगर उसे क्या पता — भूलने का कोई फ़ॉर्मूला नहीं मिलता शीशे का दिल था मेरा, टूट गया एक धक्के से अब उसके टुकड़े जोड़ने का कोई दर्ज़ी नहीं मिलता तूने अपने हाथ से लिखी थी कभी एक चिट्ठी आज वो चिट्ठी है, पर उसे पढ़ने का जी नहीं मिलता जब कोई पूछता है: "कैसा है तुम्हारा हाल?" सच कहता हूँ तो यक़ीन करने वाला दिल नहीं मिलता मैं उस गली का पत्थर हूँ, जहाँ तू रोज़ गुज़रे तेरे क़दमों की आहट से बढ़कर कोई मंज़र नहीं मिलता सौ बार तोड़ा है दिल, सौ बार जोड़ा है एक बार तेरे हाथों से बिखरने का मज़ा नहीं मिलता आखिरी बात ये कहकर चला जाता हूँ तुझसे: तू मुझसे दूर जितनी है, उतनी तू करीब नहीं मिलता
"Tujhse Door Hoon" is a heart-wrenching Urdu gazal about love, separation, and the quiet desperation of longing. Written in the classical style with a single radif (nahin milta), these 24 couplets explore the pain of loving someone who is no longer yours — yet never leaves your breath, your dreams, or the empty streets of their city. Each verse is a slow confession. Each rhyme is a ghost. This is not a song. This is silence that learned to speak. दिल को सुकूँ आराम कहीं भी नहीं मिलता तुझसे जो दूर हूँ मुझे कुछ भी अच्छा नहीं मिलता हर सुबह तेरी याद लगे जैसे कोई ज़ंजीर तेरे बिना ये दिल किसी और में नहीं मिलता बाग़ों में फूल खिले हैं मगर ख़ुश्बू तुम्हारी जब तुम नहीं तो फूल से दिल का रुतबा नहीं मिलता रातों को चाँद तारे सब रोते हैं मेरे साथ ऐसे में नींद का एक पल भी मुश्किल नहीं मिलता हाथों में हाथ तुम्हारे होते तो क्या बात होती अब तो बस सपनों में वो हाथों का छुआ नहीं मिलता तेरे शहर की गलियाँ मुझसे पूछती हैं अक्सर वो दीवाना क्यूँ भटके, उसका कोई ठिकाना नहीं मिलता मैंने तो चाहा था तुझे उस तरह जैसे मूर्ति में देवता पर तेरे दिल में मेरे लिए एक कोना भी नहीं मिलता दूरियाँ इतनी बढ़ गई हैं के फ़ासले सिमटते नहीं हर मोड़ पर तुम नज़र आते हो, मगर तुम नहीं मिलता जब भी लिखता हूँ तेरा नाम, काग़ज़ जल उठता है शायद अब इस कलम में वो जादू नहीं मिलता खुदा से ये दुआ है कि तू हमेशा खुश रहे मगर तेरी ख़ुशी में मेरा कोई हिस्सा नहीं मिलता अब तो बस इश्क़ ही बचा है, और इश्क़ की आग बुझाने वाला कोई सावन भी नहीं मिलता दिल के दरवाज़े पे लिखा है: "बस एक तुम्हारा नाम" कोई और आए तो उसे दस्तक देने का हुनर नहीं मिलता हर दर्द तेरा अपना है, हर दर्द मुझे भाता है बस तेरे बिना मरहम का कोई टुकड़ा नहीं मिलता तूने पूछा था एक बार: "मोहब्बत में क्या रखा है?" आज बता दूँ — खुद से खुद को बचाने का सबब नहीं मिलता बारिश की बूँदों में तेरा चेहरा नाचता है छतरी तो ले लूँ, मगर तुम्हें भीगने से रोकने का हुनर नहीं मिलता तेरे नाम की माला जपूँ तो दिल हल्का हो बिना तेरे ज़िक्र के कोई हल्कापन नहीं मिलता हर साँस तुझसे आती है, हर साँस तुझपे जाती है बीच में कहीं साँसों को थमने का मौक़ा नहीं मिलता उसने कहा था: "भूल जा मुझे, यही अच्छा है" मगर उसे क्या पता — भूलने का कोई फ़ॉर्मूला नहीं मिलता शीशे का दिल था मेरा, टूट गया एक धक्के से अब उसके टुकड़े जोड़ने का कोई दर्ज़ी नहीं मिलता तूने अपने हाथ से लिखी थी कभी एक चिट्ठी आज वो चिट्ठी है, पर उसे पढ़ने का जी नहीं मिलता जब कोई पूछता है: "कैसा है तुम्हारा हाल?" सच कहता हूँ तो यक़ीन करने वाला दिल नहीं मिलता मैं उस गली का पत्थर हूँ, जहाँ तू रोज़ गुज़रे तेरे क़दमों की आहट से बढ़कर कोई मंज़र नहीं मिलता सौ बार तोड़ा है दिल, सौ बार जोड़ा है एक बार तेरे हाथों से बिखरने का मज़ा नहीं मिलता आखिरी बात ये कहकर चला जाता हूँ तुझसे: तू मुझसे दूर जितनी है, उतनी तू करीब नहीं मिलता
